शौर्य के साथ समरसता का संदेश : डॉ दिलीप अग्निहोत्री 

Share
लखनऊ। भारत का इतिहास शौर्य गाथाओं से भरा है। इनकी जानकारी वर्तमान पीढ़ी को होनी चाहिए।  लेकिन आक्रांताओं के प्रसंग को अपेक्षाकृत अधिक प्रमुखता मिली। उस दौर के हमारे संघर्ष उपेक्षित रह गए। राज्य सूचना आयुक्त डॉ दिलीप अग्निहोत्री ने कहा कि विदेशी आक्रांताओं के दौर में भारत कभी शांत नहीं रहा। उनके विरुद्ध निरंतर संघर्ष चलता रहा। आज इन गौरवशाली प्रसंगों से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। यह भी समझना होगा कि विदेशी आक्रांताओं ने हमारे आपसी मतभेदों का लाभ उठाया था। इससे सबक लेते हुए आज सामाजिक समरसता के महत्व को भी समझना होगा। संघर्षों के इतिहास में चित्तौड़ का नाम भी आता है। महाराण कुम्भा ने मालवा और गुजरात के मुस्लिम शासकों को रौंदने का कार्य किया था। इस विजय के उपलक्ष्य में उन्होंने 1440 ई. यहां किले का निर्माण कराया था।आक्रान्तो ने इस दुर्ग पर अनेक आक्रमण किए। रानी पदमिनी का स्वाभिमान और गौरा बादल की वीरता बलिदान के प्रसंग भी यहीं से जुड़े हैं। राज्य सूचना आयुक्त ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की चित्तौड़ यात्रा को आज के व्यापक संदर्भ में देखने की आवश्यकता है। क्योंकि उन्होंने अपनी ऐतिहासिक गौरव गाथा से प्रेरणा लेने  का संदेश दिया।इसके साथ ही संगठित और समरस समाज बनाने को भी अपरिहार्य बताया। उन्होंने चित्तौड़ में उन्होंने कहा कि चित्तौड़गढ़ का दुर्ग केवल पत्थरों से निर्मित कोई ऐतिहासिक ढांचा नहीं है, बल्कि यह भारत के स्वाभिमान,मर्यादा और राष्ट्रीय अस्मिता का प्रहरी है।जातिवाद की राजनीति भारत की नींव को कमजोर कर रही है। बांटने की राजनीति हम सबको फिर से गुलामी की ओर धकेल रही है। इससे बचने की आवश्यकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *