लखनऊ: आयुष विभाग़ के वरिष्ठ विख्यात वैद्य डॉ देवेश कुमार श्रीवास्तव ने पंचकर्म शोधन एवं रसायन चिकित्सा की महत्वपूर्ण जानकारी के साथ बताया कि आज के आधुनिक युग में अनियमित दिनचर्या, तनाव, प्रदूषण एवं गलत खान-पान के कारण शरीर में धीरे-धीरे आंतरिक टूट-फूट (डिजेनरेशन) प्रारंभ हो जाती है, जिसे अधिकांश लोग नजरअंदाज कर देते हैं। बढ़ती उम्र के साथ लीवर, किडनी, आंतें, मस्तिष्क, फेफड़े एवं त्वचा में विषैले तत्व (टॉक्सिन्स) जमा होने लगते हैं, जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता लगातार कमजोर होती जाती है और व्यक्ति अनेक जटिल एवं दीर्घकालिक रोगों से ग्रसित हो जाता है।वर्तमान समय में हार्ट ब्लॉकेज, ब्रेन से संबंधित रोग, कैंसर, पैरालिसिस, पार्किनसन्स, जोड़ों का दर्द, सफेद दाग, सोरायसिस, किडनी एवं लीवर विकार, बांझपन तथा इंपोटेंसी जैसे जटिल रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। आयुर्वेद के अनुसार इन रोगों का मुख्य कारण शरीर में दोषों (वात, पित्त, कफ) का असंतुलन तथा विषाक्त पदार्थों का संचय है, जिसे समय रहते दूर करना अत्यंत आवश्यक है।
आयुर्वेद औषधियों के लेखन छेदन भेदन प्रभाव द्वारा अंगों का शोधन चिकित्सा से शरीर की जड़ से सफाई करके शरीर में जमा विषैले तत्वों को निकालकर अंगों की कार्यक्षमता को पुनः सक्रिय किया जाता है। इसके बाद रसायन चिकित्सा स्वर्ण, रजत, हीरक, बंग आदि युक्त आयुर्वेदिक औषधियों से शरीर का पुनर्जीवन (Rejuvenation) किया जाता है। इससे कोशिकाओं में नवचेतना, स्थिरता, रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होकर जटिल से जटिल रोग भी जड़ से ठीक हो जाते है और स्वस्थ व्यक्ति को दीर्घायु ऊर्जावान व पुनर्जीवन मिलता है पंचकर्म चिकित्सा वर्ष में एक बार करना सभी को बहुत जरूरी है जिसके लिए विदेशी अब बहुतायत में आ रहे है सौ से ज्यादा देशों आयुर्वेद को अपने देश में आयुर्वेद स्थापित करने के लिए WHO के प्रयास से आयुष विभाग, भारत सरकार के साथ MOU साइन किया है तो हम सभी भारतीयों को भी आयुर्वेद रसायन चिकित्सा कराकर अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएं। यही निरोगी, संतुलित एवं दीर्घायु जीवन का सच्चा मार्ग है।स्वस्थ दिनचर्या में प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठना, गुनगुना जल पीना, 5 km चलना, प्रतिदिन योग एवं प्राणायाम संतुलित एवं सात्विक आहार लेना, जंक फूड एवं अत्यधिक तैलीय भोजन से बचना, पर्याप्त नींद लेना, ध्यान मेडिटेशन करना अत्यंत लाभकारी है।