नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका-इजराइल जंग के बीच भारत दोनों देशों के साथ बातचीत में लगा है। भारत की इन कोशिशों का इस युद्ध से सीधे-सीधे कोई लेना-देना नहीं है।यह बातचीत ईरान के चाबहार बंदरगाह के प्रबंधन को लेकर हो रही है, जो भारत के राष्ट्रहित के लिए बहुत अहम है और जंग ने इसका संकट और भी बढ़ा दिया है। ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से चाबहार बंदरगाह में भारत के हित पर पहले से मंडरा रहा संकट और गंभीर हो गया है। हालांकि, अभी तक अमेरिका या इजराइल ने यहां कोई बड़ा हमला नहीं किया है, लेकिन भारत की चिंता इस बात को लेकर है कि अमेरिका ने जो भारत के लिए चाबहार बंदरगाह को लेकर प्रतिबंधों में छूट दे रखी है, उसकी मियाद इसी महीने खत्म होने वाली है। इस मामले की जानकारी रखने वालों ने बताया कि भारत, अमेरिका से प्रतिबंधों में छूट की सीमा बढ़ाने के लिए बातचीत कर रहा है। यह प्रक्रिया युद्ध से पहले से चल रही है। इसके साथ ही भारत सरकार ईरान से भी चर्चा कर रही है, ताकि अगर अमेरिका प्रतिबंधों में छूट की मियाद नहीं बढ़ाता है तो कोई लोकल कंपनी लीगल गारंटी देकर इसका फिलहाल संचालन करे। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के साथ लीगल गारंटी पर हो रही बातचीत का एजेंडा ये है कि अगर अमेरिका बंदरगाह पर प्रतिबंधों को खत्म कर देता है या भारत को दी गई प्रतिबंधों पर छूट की मियाद को आगे बढ़ाने के लिए राजी हो जाता है तो फिर वह लोकल कंपनी संचालन का अधिकार वापस भारत को दे देगी। चाबहार बंदरगाह में भारत का सिर्फ बहुत बड़ा निवेश ही नहीं लगा है, यह सामरिक तौर पर भी हमारे लिए बहुत अहम है, जिसके चलते इससे देश का राष्ट्रहित जुड़ा हुआ है। पिछले महीने विदेश मामलों की संसदीय समिति ने चाबहार में देशहित की सुरक्षा के लिए भारत सरकार के सभी संबंधित पार्टियों के साथ बातचीत की कोशिशों का स्वागत किया था। जनवरी में एक रिपोर्ट दी थी कि इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड चाबहार बंदरगाह के प्रबंधन के लिए किसी स्थानीय कंपनी के साथ करार कर सकता है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि इस करार में लीगल गारंटी का प्रावधान होगा, जिसके तहत जब प्रतिबंध खत्म हो जाएंगे या प्रतिबंध में छूट की सीमा अमेरिका बढ़ाने का फैसला करता है तो प्रबंधन का अधिकार ईरान की लोकल कंपनी फिर से भारत को ट्रांसफर कर देगी।