हाफिज शाह आलम ने बहरी नारे वाली मस्जिद में की तरावीह मोकम्मल

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भदोही। रमजान शरीफ का 17वां रोजा ज्यादातर मस्जिदों में हुफ़्फ़ाज-ए-कराम ने नमाजे तरावीह मोकम्मल कर ली है। वहीं कुछ मस्जिदों में तरावीह जारी भी है। इसी तरह बहरी नारे पर वाली मस्जिद में हाफिज शाह आलम ने रमजान शरीफ की 17वीं शब को तरावीह मोकम्मल की। नमाजे तरावीह मोकम्मल होने के बाद हाफिज शाह आलम ने बारगाहे परवरदिगार में दोनों हांथो को उठा कर दुआ की। ऐ हम सब के पालनहार मेरे परवरदिगार हम सब की खताओं को माफ कर दे। हमारी नमाजों व रोजो को कुबूल फरमा। हम में जो बीमार है उसे शिफा अता फरमा, जो रोजी से परेशान है उन्हें रिजके हलाल अता फरमा। ऐ अल्लाह हम गुनाहगार है लेकिन तेरे हबीब के उम्मत है हमें बख़्श दे। हाफिज शाह आलम ने कहा क़ुरआन को पढ़ो हर गम दूर हो जाएगी।read more:https://khabarentertainment.in/businessman-dies-after-being-hit-by-an-unknown-vehicle-mourning-prevails/   हाफिज साहब ने अपने मुल्क में अमन शांति और खुशहाली कि दुआ की। उसके बाद नबीईल हरमैन, इमामुल क़िब्लतैन मुस्तफ़ा जाने रहमत सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम की बारगाह में सलातो सलाम का नजराना पेश किया गया। नमाजे तरावीह मोकम्मल होने पर सभी मुक्तदियों ने हाफिज शाह आलम को फूल माला पहनाकर गले लगाकर मोबारकबाद दी। इस हसीं मंजर के मौके पर पूर्व प्रधान ईसा अंसारी, इजहार अंसारी, निसार उर्फ साधु, इमामे मस्जिद मोइनुद्दीन अंसारी, आरिफ अंसारी, इरशाद अंसारी, छोटक अंसारी, हाफिज इकबाल, हाफ़िज सुल्तान, कारी साहिल, सरताज अंसारी, गुड्डू अंसारी, आदि प्रमुख रूप से रहे।

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