अशोक कुमार मिश्र:गोरक्ष पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ गोरक्षा के प्रति समर्पित है। उत्तर प्रदेश सरकार के मुखिया होने के नाते उन्होंने निराश्रित गोवंश के भरण-पोषण के लिए बजट में जहां 2000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है वहीं वृहद गो संरक्षण केंद्रों की स्थापना के लिए अलग से 100 करोड़ रुपए की व्यवस्था की है। प्रदेश में गोवंश के भरण पोषण के लिए प्रतिदिन 50 रुपए प्रति गोवंश की दर से डीबीटी के माध्यम से सीधे भुगतान किया जा रहा है।गो संरक्षण के लिए सबसे ज्यादा काम करने वाला यूपी देश का पहला राज्य बन गया है।प्रदेश में गो-संरक्षण के लिए 7,500 गो आश्रय स्थलों में 12,38,547 गोवंश संरक्षित हैं। इसके अतिरिक्त 155 वृहद गो-संरक्षण केंद्र निर्माणाधीन हैं। मुख्यमंत्री सहभागिता योजना तथा पोषण मिशन के अन्तर्गत 1,13,631 पशुपालकों को 1,81,418 गोवंश सुपुर्द किए गए हैं।पहली बार यूपी सरकार गो संरक्षण के लिए 2100 करोड़ रुपए खर्च करने वाली है। पहली बार ग्रामीण महिलाएं और किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) इस महत्त्वाकांक्षी अभियान में प्रत्यक्ष रूप से जुड़ेंगे। योगी सरकार ने गोसेवा और गो संरक्षण को ग्रामीण समृद्धि का जरिया बनाने का जो विजन रखा था, अब वह जमीनी हकीकत में बदलने जा रहा है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा है कि गो संरक्षण केवल सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा का हिस्सा नहीं, बल्कि यह आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत की दिशा में बड़ा कदम साबित हो। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि गोवंश आधारित प्राकृतिक खेती, जैविक खाद, गोमूत्र निर्मित कीट नियंत्रक और गोबर से बनने वाले उत्पादों के माध्यम से गो आश्रय केंद्रों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जाए।यूपी में गोसंरक्षण के विजन को अब आधुनिक तकनीक की शक्ति भी मिलेगी। सरकार ने आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्र और उनकी टीम के सहयोग से अब उत्तर प्रदेश की 300 से अधिक गोशालाओं में बायोगैस प्लांट स्थापित करने की योजना बनाई है। इन प्लांटों के माध्यम से गोबर-गोमूत्र से स्वच्छ ऊर्जा, जैविक खाद एवं अन्य उत्पाद तैयार किए जाएंगे, जो ग्रामीण रोजगार का बड़ा जरिया बनेंगे। पंचगव्य से तैयार उत्पादों को उद्योग से जोड़कर युवाओं के लिए आजीविका का नया मॉडल बनेगा। इस पहल की अगुवाई आईआईटी खड़गपुर के पासआउट छात्र यशराज गुप्ता कर रहे हैं, जिन्होंने जालौन में अपने चार अन्य साथियों के साथ गोसेवा आयोग की टीम से मिलकर गोसंरक्षण पर काम करने की रणनीति बनाई है। खास बात यह है कि यशराज ने एक प्रतिष्ठित सॉफ्टवेयर कंपनी का दो करोड़ रुपये का सालाना पैकेज छोड़कर गोसेवा से जुड़े इस सामाजिक और पर्यावरणीय मिशन को चुना है। यशराज का कहना है कि गो आधारित अर्थव्यवस्था भारत की परंपरा और स्थायी विकास मॉडल, दोनों से जुड़ी है। अगर तकनीक का सही उपयोग किया जाए तो यह ग्रामीण आय बढ़ाने का सशक्त माध्यम बन सकती है। शुरुआत में जालौन जिले की गोशालाओं में बायोगैस प्लांट्स स्थापित करने की योजना बनाई गई है, जिनसे जैविक खाद, बायो-सीएनजी और बिजली का उत्पादन किया जा सकेगा। सफल प्रयोग के बाद प्रदेश के 300 से अधिक गोआश्रय स्थलों में इसी तकनीक का विस्तार किया जाएगा। यशराज और उनकी टीम ने ‘पंचगव्य वैल्यू चेन’ (गोमूत्र, गोबर, दूध, दही और घी) के औद्योगिक उपयोग पर विस्तृत प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया है। गोसेवा आयोग के पदाधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ मिलकर यह टीम ऐसे उत्पाद तैयार करेगी, जिनकी बाजार में ब्रांडिंग और बिक्री की संभावनाएं मौजूद हैं। सरकार की मंशा है कि गोसंरक्षण केवल सेवा या परंपरा का विषय नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत का आधार बने।प्रदेश में गोकशी, गोतस्करों और अवैध पशु वध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत ताबड़तोड़ कार्रवाई भी लगातार की जा रही है। गोकशी को पूरी तरह से रोकने के लिए वर्ष 2020 में गोवध निवारण कानून में संशोधन किया गया और जून-2020 में उत्तर प्रदेश गोवध निवारण (संशोधन) अध्यादेश जारी किया गया। अब तक प्रदेश भर में गोकशी के 14,182 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 35,924 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। गोकशी के मामले में 35,924 आरोपियों में से 13,793 के खिलाफ गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई की गई, जबकि 178 आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) की कार्रवाई की गई। इसके अलावा 14,305 मामलों में गैंगस्टर एक्ट के तहत कठोर कार्रवाई की गई है।गोकशी के मामलों में केवल गिरफ्तारी तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रही, बल्कि आर्थिक स्तर पर भी अपराधियों पर प्रहार किया गया। गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1) के तहत कार्रवाई करते हुए लगभग 83 करोड़ 32 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की गई। इसका उद्देश्य अपराध से अर्जित संपत्ति को जब्त करने से संगठित अपराधियों की आर्थिक ताकत कमजोर करना है ताकि भविष्य में ऐसे अपराधों को पूरी तरह रोका जा सके। इतना ही नहीं कई मामलों में अवैध कमाई से खरीदी गई जमीन, वाहन और अन्य संपत्तियों को भी कुर्क किया है।योगी सरकार ने गोकशी पर नियंत्रण के लिए पुलिस की विशेष टीमें का गठन किया है। उत्तर प्रदेश गोवध निवारण (संशोधन) अध्यादेश 2020 में नियमों को सख्त किया गया है। अध्यादेश के तहत प्रदेश में गोहत्या पर 10 साल कठोर कारावास की सजा है एवं 3 से 5 लाख तक जुर्माने का प्रावधान है। गोवंश के अंगभंग करने पर 7 साल की जेल व 3 लाख जुर्माना का प्रावधान है।