नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में इज़राइल, संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच तेजी से उभरते सैन्य टकराव को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता गहराती जा रही है। इसी बीच ज्यूडिशियल काउंसिल ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को एक अत्यंत महत्वपूर्ण और तात्कालिक पत्र भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।काउंसिल ने अपने संचार में स्पष्ट किया है कि मौजूदा हालात केवल क्षेत्रीय तनाव तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि यह एक व्यापक वैश्विक संकट का रूप ले सकते हैं। परिषद से आग्रह किया गया है कि बिना देरी के आपातकालीन बैठक बुलाई जाए और तत्काल प्रभाव से बाध्यकारी युद्धविराम प्रस्ताव पारित किया जाए।पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने अब भी निष्क्रियता दिखाई, तो इसके परिणाम विनाशकारी हो सकते हैं। पिछले कुछ सप्ताहों में संघर्ष ने अत्यंत उग्र रूप ले लिया है, जिसमें बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान, मिसाइल हमले और व्यापक तबाही की घटनाएं सामने आई हैं। इज़राइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए समन्वित हमलों के बाद तेज जवाबी कार्रवाई ने हालात को और विस्फोटक बना दिया है।ज्यूडिशियल काउंसिल के चेयरमैन राजीव अग्निहोत्री ने कहा कि वर्तमान घटनाक्रम एक खतरनाक दिशा की ओर संकेत कर रहे हैं, जहां सैन्य गतिविधियों का विस्तार, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर खतरा और क्षेत्रीय अस्थिरता लगातार बढ़ रही है। उन्होंने आगाह किया कि यह स्थिति अब केवल आशंका नहीं, बल्कि एक बड़े अंतरराष्ट्रीय संघर्ष की वास्तविक संभावना बन चुकी है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है।काउंसिल ने इस संघर्ष से उत्पन्न मानवीय संकट पर भी गंभीर चिंता जताई है। लगातार बढ़ती जनहानि, बुनियादी ढांचे का विनाश और बड़े पैमाने पर विस्थापन ने अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के पालन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नागरिक आबादी इस हिंसा का सबसे अधिक खामियाजा भुगत रही है।अपने पत्र में काउंसिल ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो यह संकट वैश्विक व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और आर्थिक स्थिरता को गहरे रूप से प्रभावित कर सकता है। विशेष रूप से विकासशील देशों और कमजोर वर्गों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ने की आशंका जताई गई है।राजीव अग्निहोत्री ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से चार प्रमुख कदम उठाने की अपील की है—तत्काल आपात बैठक बुलाना, प्रभावी युद्धविराम लागू करना, संबंधित देशों के बीच प्रत्यक्ष कूटनीतिक वार्ता शुरू कराना और नागरिकों की सुरक्षा के साथ मानवीय सहायता की निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करना।उन्होंने कहा कि यह समय निर्णायक कार्रवाई का है और किसी भी प्रकार की देरी या चुप्पी अंतरराष्ट्रीय दायित्वों की विफलता मानी जाएगी। काउंसिल ने वैश्विक संस्थाओं से अपील की है कि वे राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर मानवता, शांति और विधि के शासन की रक्षा के लिए एकजुट होकर कदम उठाएं।अंत में अग्निहोत्री ने चेतावनी दी कि दुनिया एक बेहद नाजुक मोड़ पर खड़ी है और यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह संघर्ष वैश्विक आर्थिक संकट, महंगाई, ऊर्जा अस्थिरता और मानवीय आपदा को जन्म दे सकता है।