मस्जिदों में अदा की गई अलविदा की नमाज

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उतरौला बलरामपुर/माह-ए-रमजान के आखिरी शुक्रवार  को मस्जिदों में जुमा अलविदा की नमाज अदा की गई।  मस्जिदों में  हजारों मुसलमानों के सर अल्लाह के  सजदे में झुकें और मुल्क में सुख शांति की दुआ की गई। अलविदा की नमाज के दौरान पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। दोपहर में अजान होते ही पुरुष व बच्चे मस्जिदों में पहुंचकर जुमा अलविदा की नमाज अदा किया।
ईद खुशियों का त्योहार, इबादत का इनाम- मौलाना नूरुद्दीन इस्माइली अबरार मस्जिद के इमाम व जामिया अहले सुन्नत गुलशन-ए-तैयबा फातिमा के प्रिंसिपल मौलाना मुहम्मद नूरुद्दीन इस्माइली ने कहा है कि ईद-उल-फ़ित्र मुसलमानों के लिए सिर्फ खुशी का दिन नहीं, बल्कि अल्लाह तआला की ओर से दिया गया एक बड़ा इनाम और रहमत का अवसर है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि रमज़ान के पूरे महीने में रोज़ा, नमाज़, कुरआन की तिलावत और परहेज़गारी के जरिए बंदे अल्लाह की रज़ा हासिल करने की कोशिश करते हैं। इसी इबादत और सब्र के बाद ईद का दिन आता है, जो इन कोशिशों का इनाम होता है। कहा कि ईद के दिन हर तरफ खुशी का माहौल होता है। लोग नए कपड़े पहनकर ईदगाह पहुंचते हैं, नमाज़-ए-ईद अदा करते हैं और एक-दूसरे को गले लगाकर मुबारकबाद देते हैं। यह खुशी सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक और सामूहिक होती है।मौलाना इस्माइली ने ज़ोर देकर कहा कि ईद का असली मकसद अल्लाह का शुक्र अदा करना है। इस दिन ज़्यादा से ज़्यादा इबादत, ज़िक्र और नेमतों के लिए शुक्रगुज़ारी करनी चाहिए।उन्होंने गरीबों और ज़रूरतमंदों का ख़ास ख्याल रखने की अपील करते हुए कहा कि असली ईद तब पूरी होती है, जब समाज का हर तबका खुशियों में शामिल हो। मौलाना ने अंत में कहा कि ईद केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि रहमत, इनाम और इंसानियत का संदेश है। सभी मस्जिदों में इमाम द्वारा तकरीर और अलविदाई खुतबा हुआ। इसके बाद दो रकात जुमा अलविदा की नमाज अदा की गई। अलविदा पर मस्जिदों में नमाजियों की भारी संख्या के मद्देनजर नमाज पढ़ने के लिए अतिरिक्त चटाई, वजू करने के लिए पानी आदि की व्यवस्था जनपद के तमाम मस्जिदों में रखा गया था। अलविदा की नमाज अदा करने के बाद लोगों ने अल्लाह से अपने रोज़े नमाज़ व इबादत को कबूल करने की दुआ की।

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