भदोही। रमज़ान का मुक़द्दस महीना नेकी कमाने का महीना है इस महीने में इंसान नेकी करके अपनी दुनिया व आख़ेरत को मज़बूत करता है। 20 रमज़ान से ईद का चाँद होने तक मस्जिद में खुद को अपने रब के लिए वक़्फ़ कर देने का नाम एतेक़ाफ़ है ये सुन्नते केफाया है यानि मुहल्ले का कोई एक शख्स भी एतेक़ाफ़ मे बैठ गया तो पूरा मुहल्ला गुनाहो से बरी अगर कोई एतेक़ाफ़ के लिए मस्जिद में नहीं बैठा तो पूरा मुहल्ला गुनहगार होगा और पुरे मोहल्ले पर अज़ाब नाज़िल होगा।एतेक़ाफ़ प्यारे आक़ा सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम की सुन्नतो मे से एक है।एतेक़ाफ़ का लफ़्ज़ी मायने अल्लाह की इबादत में बैठना या खुद को अपने रब के लिए वक़्फ़ कर देना।उक्त बातें इमामे ईदगाह हाफ़िज़ अशफ़ाक़ रब्बानी ने एतेक़ाफ़ की फ़ज़ीलत, क़ुरआन व सुन्नत की रौशनी में बताते हुए कहा। श्री रब्बानी ने बताया कि एतेक़ाफ़ अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त को राज़ी करने के लिए रोज़ेदार बैठते हैं और एतेक़ाफ़ सुन्नते खैरुल अनाम सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम है।read more:https://pahaltoday.com/kiyu-submitted-a-memorandum-to-the-bdo-regarding-the-problems-of-the-gram-panchayats/
हदीसे पाक ब्यान करते हुए बताया की रसूले मोअज़्ज़म सरकारे मदीना सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम रमज़ान के आखिरी अशरे का एतेकाफ़ करते थे। 20 रमज़ान को प्यारे आक़ा स. मस्जिद के एक कोने में एतेकाफ़ पर बैठते और ईद का चाँद देखने के बाद घर लौटते थे। इस दौरान आक़ा स.दुनिया की तमाम खूबियों से दूर हो कर सिर्फ इबादत मे ही मशगूल रहा करते और अपने रब से रो-रो कर अपनी उम्मत के लिए दुआएं माँगा करते थे।बताया पैग़म्बरे इस्लाम नबी-ए-आखेरुज़्ज़मा मोहम्मदे अरबी सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम कई बार रमज़ान भर एतेकाफ़ पर बैठते थे। एक रवायत है कि एक बार सफ़र में होने की वजह से सरकारे मदीना स.एतेकाफ़ पर नहीं बैठ सके तो अगले रमज़ान मे आक़ा स. ने 20 दिन एतेकाफ़ रखा इसलिए मोमिनीन को चाहिए कि कम से कम एक बार वो अपनी ज़िन्दगी मे एतेकाफ़ पर ज़रूर बैठे। इससे उसकी तमाम गुनाहो की माफ़ी हो जाती है। ऐ मेरे पाक परवर्दीगारे आलम तू अपने हबीब स.के सदके मे हम सब मुसलमानो को रोज़ा रखने नमाज़ पढ़ने तिलावते क़ुरआने हकिम करने और हक़ की ज़िन्दगी जीने की तौफ़ीक़ अता फरमा, बुराइयां ख़त्म हो समाज में अच्छा माहौल बने,मुल्क में अम्न का बोल बाला हो और मजहबे इस्लाम का गुलशन सुबहे क़यामत तक महकता रहे। आमीन