पंचायत चुनाव पर असमंजस, कार्यकाल समाप्ति से पहले ही मुखर हुए प्रधान — ज्ञापन देकर उठाई अधिकार बनाए रखने की मांग

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गाजीपुर। प्रदेश में आगामी पंचायत चुनाव को लेकर अनिश्चितता का माहौल गहराता जा रहा है। एक ओर जहां ग्राम प्रधानों का कार्यकाल आगामी 26 मई को समाप्त होने जा रहा है, वहीं दूसरी ओर अब तक न तो आरक्षण प्रक्रिया का कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी हुआ है और न ही परिसीमन की स्थिति स्पष्ट हो सकी है। ऐसे में समय पर चुनाव कराए जाने को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है, जिससे ग्राम प्रधानों में बेचैनी और चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
सूत्रों की मानें तो अब यह चर्चा भी जोर पकड़ने लगी है कि पंचायत चुनाव वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद कराए जा सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो वर्तमान ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम पंचायतों का प्रशासनिक नियंत्रण पूरी तरह से प्रशासनिक अधिकारियों के हाथों में चला जाएगा। इससे जनप्रतिनिधियों की भूमिका समाप्त हो जाएगी, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिहाज से भी एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।इसी मुद्दे को लेकर मंगलवार को गाजीपुर जिले में प्रधान संघ ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार तरीके से आवाज बुलंद की। जिले भर से बड़ी संख्या में प्रधान सरजू पांडे पार्क में एकत्र हुए, जहां एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित कर आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक के बाद प्रधानों ने नारेबाजी करते हुए जुलूस निकाला और जिला अधिकारी कार्यालय तक पहुंचे।
प्रधान संघ के जिलाध्यक्ष मदन सिंह यादव के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी के माध्यम से प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में प्रमुख रूप से यह मांग की गई कि अन्य राज्यों जैसे राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार उनके पास ही बनाए रखे जाएं या फिर उनके कार्यकाल को विधिवत बढ़ाया जाए।read more:https://worldtrustednews.in/voices-raised-in-support-of-small-and-medium-newspapers-demand-for-fair-distribution-of-government-advertisements-intensifies/
प्रधानों का कहना है कि यदि उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद उनके अधिकार छीन लिए जाते हैं तो इसका सीधा असर गांवों में चल रहे विकास कार्यों पर पड़ेगा। योजनाएं अधर में लटक सकती हैं और आम जनता को बुनियादी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस विषय में जल्द से जल्द स्पष्ट निर्णय लिया जाए, ताकि ग्राम स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित होती रहे।जिलाधिकारी ने प्रधानों को आश्वासन दिया कि उनके द्वारा सौंपे गए ज्ञापन को शासन स्तर तक पहुंचाया जाएगा और इस पर उचित विचार किया जाएगा। हालांकि अभी तक स्थिति स्पष्ट न होने के कारण जिले के प्रधानों में असमंजस और असंतोष का माहौल बना हुआ है।इस मौके पर सैदपुर के अध्यक्ष रजाई यादव, मोहम्मदाबाद के अध्यक्ष बृजलाल यादव, करंडा के अध्यक्ष मोती यादव, मरदह के अध्यक्ष राधेश्याम यादव, जमानिया के अध्यक्ष रामानंद यादव सहित बलवंत सिंह गहमरी, सुभाष यादव, सुदर्शन कुशवाहा, सिराज खान, जितेंद्र कुमार, रमेश यादव, कृष्णानंद, संजय यादव, हस्नु बानो, राजेश बनवासी, जयप्रकाश यादव, गोपाल पासी, श्याम नारायण यादव, अनिल प्रकाश, हरिदास यादव, मनोज यादव, कुंवर बहादुर, लालमणि, रमेश पासवान, राम अवध भारद्वाज, छागुर यादव, राम शोएब अली, भवन राम, डॉ. श्याम चरण, राज यादव, हरिवंश राम, रामप्रसाद, भोला यादव, सोनू यादव समेत सैकड़ों की संख्या में प्रधान मौजूद रहे।read more:https://worldtrustednews.in/sahitya-chetna-samaj-holds-condolence-meeting-on-the-demise-of-swara-samragini-asha-bhosle-pays-heartfelt-tribute/

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