नांगल सोती/बिजनौर।
एक ओर सरकार ‘स्वच्छ भारत अभियान’ और ‘स्वच्छ ग्राम-स्वस्थ ग्राम’ जैसे नारों पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है, वहीं जनपद बिजनौर के नांगल सोती, जीतपुर और खानपुर गांवों में जमीनी हकीकत इसके उलट है। यहाँ कूड़ा प्रबंधन की व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है, जिसके चलते ग्रामीणों ने मजबूरी में सरकारी नहर को ही ‘कूड़ाघर’ बना दिया है। प्रशासन की अनदेखी और ग्राम पंचायतों की निष्क्रियता के कारण यह नहर अब जलमार्ग नहीं, बल्कि गंदगी का डंपिंग यार्ड बन चुकी है।व्यवस्था का अभाव: कहाँ डालें कूड़ा?
इन गांवों के निवासियों की सबसे बड़ी पीड़ा यह है कि घरों से निकलने वाले कचरे के निस्तारण के लिए न तो कोई सार्वजनिक स्थान चिह्नित किया गया है और न ही कूड़ा उठाने की कोई नियमित व्यवस्था है। ऐसे में लोग अपने घरों का कचरा सीधे नहर में प्रवाहित कर रहे हैं। परिणाम यह है कि नहर में प्लास्टिक की थैलियों, घरेलू कचरे और गंदगी का अंबार लग गया है, जो पर्यावरण के लिए एक टाइम बम की तरह है।read more:https://khabarentertainment.in/police-launched-mission-shakti-5-0-campaign-women-and-girls-were-informed-about-their-safety-and-rights
खेती और मिट्टी पर मंडराता खतरायह स्थिति मात्र गंदगी तक सीमित नहीं है। इसी नहर के पानी का उपयोग किसान अपनी फसलों की सिंचाई के लिए करते हैं। प्लास्टिक और रसायनों से युक्त यह प्रदूषित पानी खेतों में पहुँच रहा है, जिससे फसलों की गुणवत्ता और मिट्टी की उर्वरता पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है। सिंचाई के साथ खेतों में पहुँचता प्लास्टिक भविष्य में कृषि भूमि को बंजर बना सकता है।
शराब के ठेके और ‘ओपन बार’ का कहरनहर के किनारे स्थित दो सरकारी शराब के ठेकों ने इस समस्या को और अधिक विकराल बना दिया है। यहाँ शराब पीने के बाद लोग प्लास्टिक के गिलास, खाली टेट्रा पैक और कांच की बोतलें बेधड़क नहर में फेंक देते हैं। आसपास कहीं भी कूड़ेदान नजर नहीं आता, जिससे पूरा किनारा शराब की खाली बोतलों और कचरे से पटा रहता है।read more:https://khabarentertainment.in/awarded-for-outstanding-contribution-in-the-field-of-women-empowerment/
जिम्मेदारों की ‘चुप्पी’ पर सवालइस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल विभागीय जवाबदेही पर उठता है क्या ग्राम पंचायतों को कूड़ा प्रबंधन के लिए मिलने वाला बजट केवल कागजों तक सीमित है? क्या स्थानीय प्रशासन और सिंचाई विभाग को नहर की यह बदहाल स्थिति दिखाई नहीं देती? आखिर कब तक ‘सब ठीक है’ मोड में रहकर जिम्मेदार अपनी आंखें मूंदें रहेंगे?नागरिक बोध की भी कमी
इस समस्या के लिए जहाँ सिस्टम दोषी है, वहीं आम जनता की लापरवाही को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बिना सोचे-समझे जल स्रोतों में कचरा फेंकना हमारी नागरिक चेतना की कमी को दर्शाता है। व्यवस्था की कमी अपनी जगह है, लेकिन जल को प्रदूषित करना भविष्य की पीढ़ियों के साथ खिलवाड़ है।अगर समय रहते प्रशासन ने कूड़ा निस्तारण की ठोस व्यवस्था नहीं की और नहर की सफाई पर ध्यान नहीं दिया, तो यह लापरवाही क्षेत्र के पर्यावरण और कृषि अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा संकट बन जाएगी। अब देखना यह है कि प्रशासन इस रिपोर्ट के बाद जागता है या ‘कागजी स्वच्छता’ का खेल यूँ ही चलता रहेगा।read more:https://khabarentertainment.in/three-blood-donors-donated-blood-on-behalf-of-jai-ambe-blood-donation-committee-