बंगाल चुनाव में हिंसा टालिए : ट्रम्प की शांति अपील

Share
वीरेंद्र बहादुर सिंह –बंगाल में चुनाव घोषित होते ही ट्रम्प घबरा गए। उन्होंने तुरंत नेतन्याहू को फोन किया, “डियर दोस्त, अब हमें ईरान के खिलाफ युद्ध रोक देना पड़ेगा।”नेतन्याहू नाराज़ हो गए, “अरे यार, ये तो अभी झांकी है, आगे लड़ाई बाकी है।”ट्रम्प उलझ गए, “हैं? ये क्या मतलब?”नेतन्याहू हंसते हुए बोले, “दोस्त, अगर तुम मेरे भारत वाले भाइयों से थोड़ा ठीक से दोस्ती निभाओगे, तो तुम्हें ऐसे नारे सुनने और सीखने मिलेंगे। वे लोग ऐसे नारों पर ही चुनाव लड़ जाते हैं।”ट्रम्प के माथे पर पसीना आ गया, “हां … चुनाव। मैंने तो चुनाव की ही बात करने के लिए फोन किया था।”नेतन्याहू फिर हंहने लगे, “अरे बास, आपकी तो वैसे भी ये राष्ट्रपति के रूप में आखिरी टर्म है। उसके बाद क्या आप मेलानिया को चुनाव लड़वाओगे या इवांका को? चलो, भारत वालों से आपने इतना तो सीख लिया कि लोकतंत्र में भी वंशपरंपरा आगे बढ़ानी चाहिए।”ट्रम्प ने दांत भींचे, “अरे यार, यहां अमेरिका में भी मेरी बात कोई शांति से नहीं सुनता और पूरी दुनिया में भी मुझे कोई गंभीरता से नहीं लेता। अब प्लीज़, आप तो मेरी बात ध्यान से सुनिए। मैंने सुना है कि बंगाल में चुनाव दुनिया के किसी भी युद्ध से ज्यादा भयंकर होते हैं। वहां कार्यकर्ता आमने-सामने नारे नहीं लगाते, बल्कि बमबारी करते हैं। एक-दूसरे के हाथ काट देना या सिर फोड़ देना वहां चुनाव में बहुत आम बात है। मैं उन लोगों से शांति की अपील करना चाहता हूं कि बिना ज्यादा हिंसा के, प्यार से चुनाव लड़ें।”नेतन्याहू ने हंसी रोकते हुए कहा, “देखो, मुझसे कहा तो कहा, लेकिन किसी और से मत कहना। दुनिया को लगेगा कि ट्रम्प जैसे ट्रम्प हिंसा और खून-खराबे से डर गए।”
ट्रम्प चिढ़कर बोले, “भाई, मुझे हिंसा से डर नहीं लगता। डर सिर्फ इतना है कि अब बंगाल के चुनाव में जब धूम-धड़ाका शुरू होगा, तो हमारी लड़ाई लोग भूल जाएंगे। दुनिया भर के टीवी चैनलों पर मेरी टीआरपी गिर जाएगी। मैं दुनिया के किसी भी देश के बीच युद्धविराम की घोषणा कर सकता हूं, लेकिन बंगाल में तो मेरे कहने से कोई युद्धविराम करेगा, ऐसा नहीं लगता।”नेतन्याहू बोले, “अरे यार, हमारी लड़ाई तो अभी आधी ही हुई है और तुम ऐसी ढीली-ढाली बातें करने लगे। चलो, तुम्हें युद्ध का जोश चढ़े, इसके लिए ममता बनर्जी को कॉन्फ्रेंस कॉल पर ले लेता हूं।”ट्रम्प घबरा गए और तुरंत फोन काट दिया। क्योंकि चुनाव और युद्ध, दोनों खत्म होने के बाद महंगाई बढ़ती ही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *