Ajit Vikram: गाजीपुर। मौसम में हो रहे बदलाव के साथ बच्चों में डायरिया (दस्त) और निमोनिया के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों में इन बीमारियों के लक्षण दिखाई देते ही तुरंत नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सकीय परामर्श लें। विभाग के अनुसार जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में ओआरएस और जिंक की दवाएं निःशुल्क उपलब्ध हैं तथा आवश्यक जांच और उपचार की समुचित व्यवस्था की गई है।मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील कुमार पांडे ने बताया कि बदलते मौसम में छोटे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ जाती है, जिससे डायरिया और निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है। यदि अभिभावक प्रारंभिक लक्षणों की पहचान कर तुरंत आशा, एएनएम या नजदीकी स्वास्थ्य इकाई से संपर्क करें, तो बच्चे को गंभीर स्थिति में जाने से रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि समय पर ओआरएस, जिंक और आवश्यक दवाओं के सेवन से अधिकतर मामलों में बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं।read more :https://khabarentertainment.in/hafiz-asif-completed-taraweeh-prayers-at-taha-jama-masjid-on-the-west-side/ विशेषज्ञों के अनुसार पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों में होने वाली मृत्यु का लगभग 15 से 20 प्रतिशत हिस्सा डायरिया और निमोनिया से जुड़ा होता है। हालांकि समय पर उपचार और सावधानी बरतने से इन बीमारियों पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। ओआरएस और जिंक के नियमित उपयोग से डायरिया के 90 प्रतिशत से अधिक मामलों का प्रभावी प्रबंधन संभव है, वहीं निमोनिया की शीघ्र पहचान से जटिलताओं को रोका जा सकता है।डॉ. स्वतंत्र सिंह ने बताया कि बच्चों में दस्त होने पर तुरंत ओआरएस घोल देना शुरू करें और स्वास्थ्य कार्यकर्ता से संपर्क कर 14 दिन तक जिंक की गोली देना सुनिश्चित करें। इसके साथ ही बार-बार स्तनपान कराना और बच्चे को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि निमोनिया के लक्षण दिखने पर देरी नहीं करनी चाहिए। घर पर इलाज करने या झोलाछाप डॉक्टर से दवा लेने से स्थिति बिगड़ सकती है। समय पर इलाज से अधिकतर बच्चों को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता भी नहीं पड़ती।
डायरिया के प्रमुख लक्षण
बार-बार पतला या पानी जैसा मल आना
उल्टी होना
तेज प्यास लगना
मुंह और जीभ का सूखना
पेशाब कम आना
निमोनिया के प्रमुख लक्षण
तेज बुखार
खांसी के साथ तेज या कठिन सांस लेना
सांस लेते समय सीने का धंसना
बच्चे का दूध या भोजन ठीक से न लेना
अत्यधिक सुस्ती या प्रतिक्रिया में कमी
स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि बदलते मौसम में बच्चों के खानपान, साफ-सफाई और गर्म कपड़ों पर विशेष ध्यान दें, ताकि उन्हें अस्पताल ले जाने की नौबत ही न आए।