गाज़ीपुर। जनपद के जिला कारागार में शनिवार, 28 मार्च 2026 को उस समय हड़कंप मच गया जब जिला जज, जिलाधिकारी विकास कुमार एवं पुलिस अधीक्षक डॉ. ईरज राजा ने संयुक्त रूप से औचक निरीक्षण किया। बिना पूर्व सूचना के पहुंचे वरिष्ठ अधिकारियों की टीम को देखते ही जेल प्रशासन में अफरा-तफरी की स्थिति उत्पन्न हो गई और सुरक्षा कर्मी सतर्क हो उठे।निरीक्षण की शुरुआत कारागार के मुख्य द्वार से ही कड़ी सुरक्षा जांच के साथ हुई। अधिकारियों ने प्रवेश व्यवस्था, सुरक्षा उपकरणों एवं तैनात सुरक्षाकर्मियों की कार्यप्रणाली का जायजा लिया। इसके बाद टीम ने एक-एक कर बैरकों का निरीक्षण किया और बंदियों के बीच सघन तलाशी अभियान चलाया गया। तलाशी के दौरान बैरकों, शौचालयों, नालियों तथा अन्य संभावित स्थानों को बारीकी से खंगाला गया, ताकि किसी भी प्रकार की प्रतिबंधित सामग्री की मौजूदगी की संभावना को समाप्त किया जा सके।जिला जज धर्मेंद्र कुमार पांडे ने निरीक्षण के दौरान न्यायिक दृष्टिकोण से बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं, उनके अधिकारों तथा विधिक सहायता की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने बंदियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को उनके त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए।जिलाधिकारी विकास कुमार ने कारागार की समग्र व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने साफ-सफाई, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं और आवासीय व्यवस्था का निरीक्षण करते हुए कहा कि जेल परिसर में स्वच्छता और स्वास्थ्य मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण एवं आवश्यक दवाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।पुलिस अधीक्षक डॉ. ईरज राजा ने सुरक्षा व्यवस्था की गहन समीक्षा करते हुए कारागार प्रशासन को सख्त निर्देश दिए कि जेल के अंदर और बाहर 24 घंटे प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने सीसीटीवी कैमरों की कार्यस्थिति, ड्यूटी रजिस्टर, गश्त व्यवस्था और संवेदनशील बिंदुओं की निगरानी का बारीकी से परीक्षण किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सुरक्षा में जरा सी भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नियमित अंतराल पर सघन तलाशी अभियान चलाया जाना अनिवार्य है।निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने कारागार की मेस का भी निरीक्षण किया। यहां बंदियों को परोसे जा रहे भोजन की गुणवत्ता, पोषण स्तर और स्वच्छता की जांच की गई। रसोईघर में साफ-सफाई, भोजन बनाने की प्रक्रिया एवं खाद्य सामग्री के भंडारण की स्थिति पर विशेष ध्यान देते हुए सुधारात्मक निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने कहा कि बंदियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप शुद्ध, पौष्टिक एवं समय पर भोजन उपलब्ध कराया जाना चाहिए।इसके अतिरिक्त अधिकारियों ने कारागार के अभिलेखों, बंदी रजिस्टर, मुलाकात व्यवस्था, निगरानी प्रणाली और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की भी गहन समीक्षा की। उन्होंने पारदर्शिता बनाए रखने, रिकॉर्ड को अद्यतन रखने और प्रत्येक गतिविधि का समुचित लेखा-जोखा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।संयुक्त रूप से अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कारागार केवल बंदियों को रखने का स्थान नहीं, बल्कि सुधार और पुनर्वास का केंद्र भी है। इसलिए यहां अनुशासन, सुरक्षा और मानवीय दृष्टिकोण का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता पाई गई तो संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।निरीक्षण के दौरान कारागार अधीक्षक सहित अन्य प्रशासनिक एवं सुरक्षा अधिकारी उपस्थित रहे। सभी को उच्चाधिकारियों द्वारा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए, जिससे कारागार की व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़, पारदर्शी एवं सुरक्षित बनाया जा सके।