रमजान के आखिरी अशरे में करें खूब इबादत जो 21,23,25,27 और 29वीं शब होती है शबेक़द्र कि रत

Share
शबेक़द्र की रात होती है हजार महीनों से बेहतर: हमारे शहर के मोअज्जिज शख्सियत
भदोही। रमज़ान महीने की इबादतों के क्या कहने अल्लाह हो अकबर। रब का आफर केवल इसी महीने में ज्यादा रहता है वो इसलिए की यह महीना अल्लाह का महीना है जिसके शुरू होते ही शैतान गिरफ्तार कर लिया जाता है और जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं जहन्नुम के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। इस महीने के आखिरी अशरे के दस दिनों में पांच रातें ऐसी होती हैं जिन्हें ताक़ रातें कहा जाता है। रमज़ान की 21, 23, 25, 27 व 29 वीं की शब। इममें से कोई एक शबेकद्र की रात होती है।read more:https://pahaltoday.com/call-for-chalo-ghazipur-resonates-at-pda-chaupal-preparations-underway-to-make-kanshi-ram-jayanti-grand/
यह रात हजार महीनों से बेहतर मानी जाती है। यही वजह है कि इन पांचों रातों में मुसलमान मस्जिदों व घरों में अल्लाह की कसरत से इबादत करते हैं। यही वजह है कि मर्द ही नही महिलाएं और बच्चे भी घरों में रात जागकर इबादत करते दिखाई देते हैं। हमारे शहर के मोअज्जिज शख्सियत सरवर सिद्दीकी, मुशीर इकबाल, नुरैन खान, जावेद खान, अमजद खान, हाजी इमाम बेग कहते हैं कि अल्लाह कहता है कि तुम्हारे लिए एक महीना रमजान का है, जिसमें एक रात है जो हजार महीनों से अफजल है। उस रात का नाम शबे कद्र है। यानी यह कद्र वाली रात है, जो शख्स इस रात से महरूम रह गया वो भलाई और खैर से दूर रह गया। जो शख्स इस रात में जागकर ईमान और सवाब की नीयत से इबादत करता है तो उसके पिछले सभी गुनाह माफ कर दिए जाते हैं। कहा गया कि यह रात बड़ी बरकतों वाली रात होती है। इस रात को मांगी गई दुआ हर हाल में अल्लाह कुबूल करता है। मेरा रब बहोत ही रहम वाला और माफ करने वाला है। लोगो ने पाक परवरदिगार से दुआ की ऐ मेरे पालनहार ऐ मेरे लिए रहमत का दरवाजा खोलने वाले परवरदिगार तू अपने हबीब (स.) के सदके में हम सबको जहन्नुम की आग से बचा और रमज़ान की इबादत की तौफीक दे। आमीन

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *