शिक्षा, समानता एवं सामाजिक परिवर्तन की प्रेरणा है सावित्री बाई फुले : प्रो हरिओम त्रिपाठी

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जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर में भारत की प्रथम महिला शिक्षिका, महान समाज सुधारक एवं नारी शिक्षा की अग्रदूत सावित्रीबाई फुले की पुण्यतिथि के अवसर पर मंगलवार को पुष्पांजलि कार्यक्रम एवं विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. वंदना सिंह की प्रेरणा से आर्यभट्ट सभागार, प्रो. राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया) संस्थान में आयोजित हुआ। इस अवसर पर शिक्षकों, अधिकारियों एवं विद्यार्थियों ने सावित्रीबाई फुले के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी और उनके महान योगदान को स्मरण किया।कार्यक्रम के मुख्य वक्ता तिलकधारी पी.जी. कॉलेज, जौनपुर के प्रख्यात शिक्षाविद् प्रो. हरिओम त्रिपाठी ने “सावित्रीबाई फुले: भारतीय महिला शिक्षा की अग्रदूत” विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि सावित्रीबाई फुले ने ऐसे समय में महिलाओं की शिक्षा का अलख जगाया, जब समाज में महिलाओं को शिक्षा से वंचित रखा जाता था। उन्होंने अपने पति महात्मा ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर समाज में शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय की मजबूत नींव रखी। उन्होंने कहा कि सावित्रीबाई फुले का जीवन साहस, संघर्ष और समाज सेवा का प्रेरणादायी उदाहरण है, जो आज भी नई पीढ़ी को शिक्षा और समानता के लिए प्रेरित करता है। read more :https://khabarentertainment.in/mentality-of-hatred-2/ परीक्षा नियंत्रक डॉ. विनोद कुमार सिंह ने कहा कि सावित्रीबाई फुले केवल एक शिक्षिका ही नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की सशक्त प्रतीक थीं। उन्होंने अपने अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प से समाज में महिलाओं तथा वंचित वर्गों के लिए शिक्षा के द्वार खोले। उनके विचार आज भी समाज को प्रगतिशील और समतामूलक दिशा प्रदान करते हैं।शिक्षा संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो. अजय दुबे ने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनाया।कार्यक्रम के संयोजक एवं अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. प्रमोद कुमार यादव ने सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन महान व्यक्तित्वों के आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम होते हैं। उन्होंने कहा कि सावित्रीबाई फुले का जीवन हमें शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय के मूल्यों को आत्मसात करने की प्रेरणा देता है।कार्यक्रम का संचालन डॉ. नितेश जायसवाल ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुनील कुमार ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन सावित्रीबाई फुले के आदर्शों को आत्मसात करने के संकल्प के साथ हुआ।

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