लक्ष्मीकांत श्रीवास्तव –गाजीपुर।बिरनो क्षेत्र के खड़का गोपालपुर गांव में मानव धर्म के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से एक व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने मानव जीवन, भक्ति, सहनशीलता और मुक्ति के विषय पर विस्तार से विचार व्यक्त किए।
मुख्य वक्ता माधव कृष्ण ने कहा कि मुक्ति का विचार अक्सर एक भ्रम की तरह है, क्योंकि लगभग हर मनुष्य किसी न किसी दासता के बंधन में बंधा हुआ है—चाहे वह धन का हो, स्त्री-पुरुष का, राजनीति का, विचारों का या किसी नेता का। उन्होंने कहा कि जो लोग स्वयं को दासता से मुक्त बताते हैं, वे भी किसी न किसी रूप में बंधन में ही रहते हैं। उन्होंने कहा कि अष्टावक्र का कथन है कि यदि मनुष्य स्वयं को मुक्त मान ले, तो वह मुक्त हो सकता है।read more:https://khabarentertainment.in/holika-dahan-took-place-on-monday-due-to-lunar-eclipse/ उन्होंने आगे कहा कि मुक्ति वही दे सकता है जो स्वयं पूर्ण रूप से मुक्त हो। प्रकृति के अंतर्गत आने वाले जीव, वस्तु और विचार स्वयं मुक्त नहीं होते, इसलिए ईश्वर की अवधारणा सामने आती है। ईश्वर उन महान सद्गुणों का समुच्चय है जिन्हें परहित, सत्य, न्याय और धर्म के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कहा कि ईश्वर की दासता ही सच्ची मुक्ति देती है और इसी को भक्ति कहा गया है।माधव कृष्ण ने कहा कि समय के साथ ईश्वर की भक्ति को भी लोग संप्रदाय, पुस्तकों, गुरुओं और नाम-रूपों की दासता में बदल देते हैं, जबकि वास्तविक भक्ति मनुष्य को असत्य, अन्याय और द्वेष से मुक्त कर सच्चा मनुष्य बनने की प्रेरणा देती है।read more:https://khabarentertainment.in/holika-dahan-took-place-on-monday-due-to-lunar-eclipse/ उन्होंने संतों की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि बाबा गोरखनाथ ने कहा था—“मरो हे जोगी मरो, मरण है मीठा”, जबकि परमहंस बाबा गंगारामदास सहनशीलता को ही धर्म बताते थे। उनके गुरु परमहंस बाबा राममंगल दास का कहना था कि शांति और दीनता के बिना भजन संभव नहीं है। इसी तरह गुरु नानक देव ने दूब की तरह सहनशील बनने की शिक्षा दी और चैतन्य महाप्रभु ने भी विनम्रता को भक्ति का आधार बताया।कार्यक्रम में राजिंदर मास्टर ने कहा कि सेवा और भजन ही मानव धर्म के प्रमुख साधन हैं। वहीं इंद्रदेव सिंह ने कहा कि परमहंस बाबा गंगारामदास जी इस युग के अवतार हैं और उनका बताया मार्ग सभी के लिए कल्याणकारी है।कार्यक्रम का संचालन साहिब सिंह यादव ने किया। इस अवसर पर उपेन्द्र, अनिरुद्ध, भोला बाबा, कवि बाबा सहित कई श्रद्धालु और ग्रामीण उपस्थित रहे।