नई दिल्ली, दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर महाविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग तथा द नेशनल एकेडमी ऑफ साइकोलॉजी (एनएओपी), इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन का सफलतापूर्वक समापन हुआ। डीयू के सर शंकर लाल कॉन्सर्ट हॉल में आयोजित इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘समकालीन भारत में मनोविज्ञान के अनुसंधान, शिक्षण एवं व्यावहारिक प्रयोग को पुनर्जीवित करना’ था। तीन दिनों तक चले इस राष्ट्रीय सम्मेलन ने मनोविज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान, शिक्षण और व्यावहारिक प्रयोग को नई दिशा देने के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।कार्यक्रम में क्लीनिकल साइकोलॉजी और हेल्थ साइकोलॉजी के क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की भूमिका और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके साथ ही देश में मनोविज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान, शिक्षण और व्यावहारिक उपयोग को नई दिशा देने के उद्देश्य से फ्यूचर एनएओपी एक्शन प्लान पर भी विचार किया गया।
read more:https://pahaltoday.com/villagers-upset-over-garbage-dumping-staged-a-protest-at-the-district-collectorate/ समापन समारोह में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की प्रो. मीनोती पांडा ने सामाजिक परिस्थितियों, मानवीय व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंधों पर प्रकाश डालते हुए वर्तमान समाज में मनोविज्ञान की बढ़ती आवश्यकता को रेखांकित किया।इस अवसर पर अम्बेडकर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. सदानंद प्रसाद, अग्रसेन कॉलेज के प्राचार्य प्रो. संजीव कुमार तिवारी मुख्य अतिथि साइंटिस्ट डॉ. जे.के. सिंह और एनएओपी के जनरल सेक्रेटरी प्रो. संजय कुमार विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सम्मेलन में देशभर से आए मनोवैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विशेषज्ञों ने मनोविज्ञान के विकास, मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक बदलाव और भविष्य की चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए।समापन समारोह में उत्कृष्ट शोध प्रस्तुतियों के लिए बेस्ट पेपर अवार्ड प्रदान किए गए तथा प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया गया। अंत में मनोविज्ञान विभाग की प्रो. मालिनी प्रिया ने धन्यवाद ज्ञापन किया।