भदोही। बाल विवाह के खिलाफ भारत की मुहिम को वैश्विक मान्यता मिली है। संयुक्त राष्ट्र ने 27 नवंबर को बाल विवाह, कम उम्र और जबरन विवाह के उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किया है। 4 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सिएरा लियोन द्वारा भारत सहित 67 देशों के समर्थन से लाए गए प्रस्ताव को पारित किया। इस दौरान जनता दल (यूनाइटेड) के प्रदेश महासचिव अवधेश कुमार सिंह ने बताया कि भारत के लिए इस तारीख का विशेष महत्व है, क्योंकि 27 नवंबर 2024 को ही भारत सरकार ने बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की शुरुआत की थी, जिसमें 25 करोड़ से ज्यादा लोगों ने बाल विवाह के खिलाफ शपथ ली थी। उन्होंने कहा कि यह पहल जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) के संस्थापक भुवन ऋभु ने की थी।read more:https://pahaltoday.com/protest-by-the-all-gondwana-students-association-and-the-gond-community/मार्च 2026 में यूएन में उनके संबोधन के बाद सिएरा लियोन की फर्स्ट लेडी डॉ.फातिमा मादा बायो ने इसका समर्थन किया और प्रस्ताव पेश किया।जेआरसी के अनुसार पिछले तीन वर्षों में उत्तर प्रदेश के 69 जिलों में 42,984 और पूरे भारत में 5.50 लाख से अधिक बाल विवाह रुकवाए गए हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे के अनुसार यूपी में बाल विवाह दर 2019-21 में 15.8 फीसदी से घटकर 2023-24 में 13.7 फीसदी रह गई है। जेडीयू नेता ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार 2030 तक बाल विवाह समाप्त करने के सतत विकास लक्ष्य के तहत काम कर रही है। इस मौके पर प्रदेश महासचिव संजय सिंह पटेल, जिलाध्यक्ष मिर्जापुर रामेश्वर सिंह, जिलाध्यक्ष भदोही सर्वेश राय, दीपक सिंह, पंकज कुमार, संतोष सिंह, विनोद कुमार, श्रवण कुमार सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।