नई दिल्ली, । दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ डूटा ने आज कला संकाय स्थित वंदे मातरम् सभागार में अपनी वार्षिक आम सभा जीबीएम का आयोजन किया। इसके बाद गेट नंबर-1 से होते हुए कुलपति कार्यालय तक मार्च निकाला गया। आम सभा में वर्ष 2025-26 के लिए सचिव की रिपोर्ट को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई, जिसे प्रो. बिमलेंदु तीर्थंकर ने प्रस्तुत किया। वहीं, कोषाध्यक्ष की रिपोर्ट डॉ. आकांक्षा खुराना ने प्रस्तुत की। आम सभा और इसके बाद निकाले गए मार्च में दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षकों और छात्रों से जुड़े कई लंबे समय से लंबित और महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। डूटा अध्यक्ष प्रो. वी. एस. नेगी ने शिक्षकों की सुरक्षा और सम्मान, पीएच.डी./एम.फिल. के लिए मिलने वाली प्रोत्साहन वेतन-वृद्धि को दोबारा शुरू करने और जारी रखने, पदोन्नति तथा नियुक्ति प्रक्रिया में हो रही देरी और अनियमितताओं, सीमित चयन मानदंड,उपयुक्त उम्मीदवार नहीं मिला’ एनएफएस के फैसलों तथा खाली शिक्षण पदों को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से भरने की मांग उठाई।read more:https://pahaltoday.com/ballia-police-receive-two-modern-interceptor-bikes-sp-omvir-singh-flags-them-off/प्रो. नेगी ने शिक्षकों के कार्यभार में स्नातक स्तर पर विद्यार्थियों को शोध कार्य में मार्गदर्शन देने को भी शामिल करने की मांग की। साथ ही, विश्वविद्यालय के अध्यादेश-6 को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ,यूजीसी के नियमों के अनुरूप बनाने पर जोर दिया। डूटा ने स्नातक पाठ्यक्रम रूपरेखा यूजीसीएफ और चौथे वर्ष की पढ़ाई लागू होने से शिक्षकों पर बढ़ रहे शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यभार का मुद्दा भी उठाया। संगठन का कहना है कि इसके अनुरूप विश्वविद्यालय में बुनियादी सुविधाओं, शिक्षकों की संख्या और आर्थिक संसाधनों में पर्याप्त वृद्धि नहीं हुई है। इसके अलावा, पदोन्नति में शिक्षकों की पहले की तदर्थ सेवा अवधि को भी मान्यता देने की मांग रखी गई। मार्च के दौरान दिल्ली सरकार द्वारा वित्तपोषित 12 कॉलेजों में शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की कमी, लंबित विभागीय साक्षात्कार और रिक्त पदों, आरक्षण नीति के सही क्रियान्वयन तथा आरक्षित श्रेणी के लंबित पदों को भरने की मांग भी उठाई गई। कॉलेज शिक्षकों के लिए डब्ल्यूयूएस सुविधाओं को बहाल करने तथा शारीरिक शिक्षा शिक्षकों, ओएमएसपी प्रशिक्षकों, अन्य शैक्षणिक कर्मचारियों और पुस्तकालयाध्यक्षों से जुड़े लंबे समय से लंबित सेवा संबंधी मामलों को हल करने की मांग भी की गई। डूटा ने विश्वविद्यालय प्रशासन से शिक्षकों के साथ सार्थक बातचीत करने और इन लंबे समय से लंबित मांगों के समाधान के लिए ठोस एवं समयबद्ध कदम उठाने की अपील की।