बाराबंकी। जिला बार के अधिवक्ता मुस्तहसन जुबैर ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की 38 इमारतों को ढहाने के आदेश के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को अधिवक्ता मुस्तहसन जुबैर के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी के माध्यम से एक ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को संबोधित था। इसमें विश्वविद्यालय के ध्वस्तीकरण आदेश को तत्काल निरस्त करने की मांग की गई है। श्री जुबैर ने कहा कि जौहर विश्वविद्यालय किसी एक संप्रदाय का नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग और गरीब छात्र-छात्राओं की शिक्षा का प्रतीक है। यहाँ हज़ारों छात्र विशेषकर समाज के वंचित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्गों के युवा, किफायती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।read more:https://khabarentertainment.in/ghosiya-nagar-panchayats-entire-system-collapsed-during-just-five-minutes-of-rain/ इस संस्थान ने पिछले वर्षों में शिक्षा के प्रसार, स्थानीय रोज़गार और क्षेत्रीय विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। एक चालू और स्थापित शैक्षणिक संस्थान को गिराने या उसके किसी हिस्से को नष्ट करने से गंभीर संकट पैदा होंगे, इससे हज़ारों नामांकित छात्रों का शैक्षणिक सत्र, डिग्री और भविष्य अधर में लटक जायेगा। ज्ञापन में उन्होंने कहा कि इस संस्थान में कोई तकनीकि या प्रशासनिक कमियाँ हैं तो उन्हें जुर्माने या नियमितीकरण या अन्य कानूनी विकल्पों द्वारा सुधार जाये। शिक्षा के मंदिर पर बुलडोज़र चलाना या उसे नष्ट करना अंतिम उपाय नहीं होना चाहिए। श्री जुबैर ने राज्यपाल से मांग करते हुए कहा कि वह अपने संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए इस विश्विद्यालय को सुरक्षित रखने का निर्देश दें और किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ की कार्यवाही पर रोक लगाए।