सहारनपुर। शहर के नवादा रोड स्थित स्वर्ण पैलेस होटल एवं बैंक्विट हॉल में बीते बुधवार देर रात आए तेज आंधी-तूफान के दौरान टिन शेड वाली छत और दीवार का हिस्सा गिरने की घटना के बाद क्षेत्र में कई सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों और सूत्रों के अनुसार रात करीब नौ बजे आए तूफान के दौरान बैंक्विट हॉल की ऊपरी संरचना का बड़ा हिस्सा अचानक धराशायी हो गया था, लेकिन इस घटना की जानकारी सुबह तक सार्वजनिक नहीं की गई। घटना को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं और आशंकाओं का माहौल बना हुआ है।read more:https://pahaltoday.com/darkness-near-the-bus-stand-became-a-problem-passengers-raised-the-demand-for-lighting/सूत्रों के अनुसार तेज हवाओं और तूफान के दबाव के चलते बैंक्विट हॉल की छत और उससे जुड़ी दीवार अचानक गिर गई। हादसे में हॉल के अंदर रखा फर्नीचर, वातानुकूलन उपकरण, सजावटी सामग्री, प्रकाश व्यवस्था और अन्य सामान क्षतिग्रस्त होने की बात सामने आ रही है। स्थानीय लोगों का दावा है कि घटना के तुरंत बाद देर रात से ही परिसर के भीतर मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया गया था। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि हादसा रात नौ बजे के आसपास हुआ था तो इसकी सूचना तत्काल प्रशासन, विकास प्राधिकरण या अग्निशमन विभाग को क्यों नहीं दी गई। लोगों के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि घटना को कई घंटों तक सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया। इसी को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं भी बनी हुई हैं। कुछ स्थानीय लोगों ने आशंका जताई कि घटना के बाद परिसर में बाहरी लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई थी। लोगों का कहना है कि बैंक्विट हॉल के आसपास सुरक्षा कर्मियों और कर्मचारियों की तैनाती बढ़ा दी गई थी, जिससे लोगों के मन में संदेह और गहरा हो गया। हालांकि किसी प्रकार की जनहानि या अनहोनी की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है। क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि यदि हादसे के समय बैंक्विट हॉल में कोई शादी समारोह या बड़ा आयोजन चल रहा होता तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी। जिस स्थान पर टिन शेड और दीवार गिरी, वहां सामान्यतः समारोहों के दौरान बड़ी संख्या में लोग बैठते हैं। ऐसे में यह हादसा भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी माना जा रहा है। स्थानीय लोगों ने बैंक्विट हॉलों की निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि शहर में कई बैंक्विट हॉल संकरी गलियों और सीमित निकासी मार्गों वाले क्षेत्रों में संचालित हो रहे हैं। कई स्थानों पर भारी टिन शेड संरचनाएं खड़ी कर दी गई हैं, जिन्हें अंदर से सजावटी पर्दों, कपड़ों और झूमरों से ढक दिया जाता है। चमकदार सजावट के पीछे वास्तविक संरचना और उसकी मजबूती आम लोगों को दिखाई नहीं देती। क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि संबंधित परिसर का निर्माण किस प्रकार की स्वीकृति के आधार पर किया गया था और क्या निर्माण स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप हुआ था। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। स्थानीय नागरिकों ने विकास प्राधिकरण, अग्निशमन विभाग और प्रशासन से पूरे मामले की संयुक्त तकनीकी जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि शहर में तेजी से बढ़ रहे होटल और बैंक्विट हॉल व्यवसाय में सुरक्षा मानकों की अनदेखी गंभीर खतरा बनती जा रही है। इससे पहले भी शहर के कई प्रतिष्ठानों में आग और अन्य हादसों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन उसके बावजूद प्रभावी स्तर पर व्यापक जांच अभियान नहीं चलाया गया। क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि बैंक्विट हॉल की पहले की स्थिति और हादसे के बाद की तस्वीरों के आधार पर संरचनात्मक जांच कराई जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि आखिर इतनी बड़ी संरचना तेज हवाओं में कैसे धराशायी हो गई। लोगों ने यह भी कहा कि यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल मामले को लेकर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत बयान सामने आने का इंतजार किया जा रहा है, जबकि क्षेत्र में घटना को लेकर चर्चाएं लगातार जारी हैं।