बलिया, रसड़ा। क्षेत्र के सिलहटा स्थित जय गुरुबंदे आश्रम में 12 से 14 मई 2026 तक आयोजित तीन दिवसीय सत्संग, भजन एवं ध्यान कार्यक्रम का गुरुवार को भव्य समापन हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर आध्यात्मिक वातावरण का लाभ उठाया। समापन अवसर पर विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।read more:https://pahaltoday.com/pokhran-nuclear-test-a-symbol-of-unwavering-willpower/जय गुरुबंदे स्वर योग साधना के मीडिया प्रभारी शशि दास द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार इस आध्यात्मिक आयोजन का उद्देश्य समाज में अध्यात्म के प्रति जागरूकता पैदा करना तथा लोगों को आंतरिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा, आत्मचिंतन एवं आत्मबोध के प्रति प्रेरित करना रहा। तीन दिनों तक चले सत्संग में भक्ति, साधना और ध्यान के विभिन्न आयामों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम के दौरान परमसंत स्वामी जय गुरुबंदे जी महाराज द्वारा स्वरचित पुस्तक “शब्द सुधा” का विमोचन भी किया गया। बताया गया कि पुस्तक में धर्म और अध्यात्म के विविध पक्षों को अत्यंत सरल, गूढ़ एवं अनुभवपरक शैली में प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक में भक्ति, ध्यान, गुरु महिमा तथा मानव जीवन में अध्यात्म के महत्व को अमृत वचनों के माध्यम से विस्तारपूर्वक समझाने का प्रयास किया गया है। मीडिया प्रभारी ने बताया कि वर्तमान भौतिकवादी युग में अध्यात्म आडंबर और पाखंड के बीच कहीं खोता जा रहा है। ऐसे समय में “शब्द सुधा” जैसी पुस्तक समाज को सही दिशा देने का कार्य करेगी। उन्होंने कहा कि संत परंपरा में भीखा साहेब, तुलसीदास, कबीर साहेब, गुरु नानक, रैदास एवं दरिया साहेब जैसे संतों ने समय-समय पर मानवता को अध्यात्म का संदेश दिया और उसी परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास परमसंत स्वामी जय गुरुबंदे जी द्वारा किया जा रहा है। पुस्तक में गुरु भक्ति को सर्वश्रेष्ठ भक्ति बताते हुए मानव जीवन के कल्याण का मार्ग दर्शाया गया है। “शब्द सुधा” में संकलित अनमोल वचन श्रद्धालुओं एवं अध्यात्म प्रेमियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेंगे। कार्यक्रम के दौरान परमसंत जय गुरुबंदे जी ने कहा— “शब्द सुधा पुस्तक लिखा, साहेब का पैगाम। पढ़ो प्रेम से जय गुरुबंदे, जागो साधन धाम।।”