प्राइवेट स्कूल किताब, ड्रेस और फीस के नाम पर चला रहे लूट का खेल, जिम्मेदार मौन

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अमेठी। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही अभिभावकों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है। फीस, किताबें और परिवहन के नाम पर निजी स्कूलों की मनमानी वसूली ने स्थिति को गंभीर बना दिया है। अप्रैल का एक सप्ताह बीतने के बावजूद जिला फीस कमेटी की बैठक न होना भी सवाल खड़े कर रहा है।जांच में सामने आया कि कई स्कूलों से जुड़ी तय दुकानों से ही किताबें, ड्रेस व अन्य सामग्री खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है, जहां कीमतें सामान्य से काफी अधिक हैं। अभिभावकों के अनुसार, एलकेजी से लेकर फस्ट क्लास तक की कुछ किताबों के लिए ₹5500 तक और कक्षा 7 के लिए ₹3000 तक वसूले जा रहे हैं।परिवहन व्यवस्था भी चिंता का विषय बनी हुई है। छोटे बच्चों को ओवरलोड वाहनों में सफर कराना और सुरक्षा मानकों की अनदेखी आम बात हो गई है।जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय कुमार तिवारी ने स्पष्ट किया कि किसी भी अभिभावक को एक ही दुकान से सामान खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि शुल्क नियमन समिति की बैठक जल्द आयोजित कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाई जाए, ताकि उन्हें राहत मिल सके।

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