रामपुर गांव के स्वघोषित ‘टेक-गुरु’ गपोड़ी राम ने जब प्रधानी का चुनाव लड़ा, तो उन्होंने गांव वालों को डरा दिया कि चित्रगुप्त ने अब बही-खाता छोड़कर लैपटॉप खरीद लिया है। उनका मुख्य चुनावी मुद्दा था—’डिजिटल पुण्य कार्ड’। गपोड़ी राम का तर्क था कि अब तक गांव के लोग जो दान-पुण्य करते थे, उसका कोई ‘ट्रैक रिकॉर्ड’ नहीं था, जिससे स्वर्ग के वीआईपी कोटे में धांधली हो रही थी। उन्होंने वादा किया कि जीतते ही वे गांव के हर व्यक्ति का एक ‘पुण्य-स्कोर’ जनरेट करेंगे, जो सीधे सैटेलाइट के जरिए परलोक के सर्वर से जुड़ा होगा। गांव के सीधे-सादे किसान, जो अब तक केवल ‘राम-राम’ जपने को ही काफी समझते थे, अचानक अपने ‘क्रेडिट स्कोर’ की तरह ‘पुण्य स्कोर’ को लेकर चिंतित हो गए। गपोड़ी राम ने पंचायत घर के बाहर एक पुरानी डिश एंटीना लगा दी और उसे ‘ब्रह्मांडीय डेटा रिसीवर’ घोषित कर दिया, जो कथित तौर पर लोगों के अच्छे कर्मों की गंध सूंघ सकता था।प्रचार के अंतिम चरण में गपोड़ी राम ने गांव के तालाब के किनारे एक ‘पाप-मुक्ति स्कैनर’ लगाया। यह वास्तव में एक खराब हो चुका फोटोकॉपी मशीन का ढांचा था, जिस पर नीली और लाल बत्तियां जल रही थीं। उन्होंने घोषणा की कि जो भी उन्हें वोट देने का संकल्प लेकर इस मशीन के सामने से गुजरेगा, उसके पिछले तीन चुनावों के ‘चुनावी पाप’ (गलत उम्मीदवार को वोट देना) तुरंत डिलीट हो जाएंगे। विपक्षी उम्मीदवार ‘बुधु राम’ इस हाई-टेक अध्यात्म के सामने पस्त थे; वे नाली और खड़ंजे की बात कर रहे थे, जबकि जनता को अपना परलोक सुधरता दिख रहा था। गांव की महिलाएं अपनी पुरानी साड़ियां और पुरुष अपने खाली झोले लेकर उस मशीन के सामने कतार में लग गए, इस उम्मीद में कि उनका ‘पाप मीटर’ शून्य हो जाएगा। गपोड़ी राम ने एक लड़का तैनात कर रखा था जो हर व्यक्ति के गुजरने पर ‘बीप’ की आवाज निकालता था, जिसे लोग ईश्वरीय मंजूरी समझकर गदगद हो रहे थे।मतदान के अगले दिन जब गपोड़ी राम की भारी जीत हुई, तो पूरा गांव अपना ‘पुण्य कार्ड’ लेने के लिए उनके घर पर उमड़ पड़ा। गपोड़ी राम ने बड़े इत्मीनान से एक प्रिंटर से कोरे कागज निकाले और उन पर बड़े-बड़े अक्षरों में ‘जीरो’ लिखकर बांटना शुरू कर दिया। जनता हक्की-बक्की रह गई, “हुजूर, यह तो शून्य है! हमारा पुण्य कहां गया?” गपोड़ी राम मंद-मंद मुस्कुराए और गंभीर आवाज में बोले— “भाइयों, आप सबको ‘जीरो’ इसलिए मिला है क्योंकि आपने एक ऐसे आदमी को वोट दिया जिसने आपको सरेआम बेवकूफ बनाया! राजनीति का पहला नियम है कि जो अपनी अक्ल का इस्तेमाल नहीं करता, उसका पुण्य-स्कोर हमेशा शून्य ही रहता है। अब अगले पांच साल इसी शून्य के साथ योगाभ्यास कीजिए, क्योंकि असली स्वर्ग तो अब केवल मेरी हवेली में उतरेगा।” जनता एक-दूसरे का मुंह ताकती रह गई और गपोड़ी राम अपनी नई सफारी के शीशे चढ़ाकर ‘डिजिटल इंडिया’ का नारा लगाते हुए जिला मुख्यालय की ओर उड़नछू हो गए।