गाजीपुर। श्री गंगा आश्रम में आयोजित 48वें मानवता अभ्युदय महायज्ञ के छठवें दिन का कार्यक्रम श्रीरामचरितमानस के पारायण एवं वैदिक हवन-यज्ञ के साथ संपन्न हुआ। दिनभर चले धार्मिक अनुष्ठानों के बाद संध्याकालीन सत्संग ज्ञानयज्ञ का शुभारंभ ईश्वर वंदना से हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति रही।सत्संग के दौरान श्री वीरेंद्र जी एवं श्री सुनील जी ने गुरु अर्चना प्रस्तुत की, जबकि श्री दीपक जी और श्री रजनीश जी ने भजनों के माध्यम से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। उनके भजनों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।व्याख्यान श्रृंखला में मोहन जी ने अहंकार त्याग और निःस्वार्थ कर्म पर बल देते हुए कहा कि परमात्मा केवल अहंकार को नष्ट करता है, इसलिए दिखावा त्याग कर साधना करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सच्चा साधक बिना किसी अपेक्षा के अपने कर्म करता रहता है, और ऐसे लोगों को जीवन में सब कुछ स्वतः प्राप्त होता है।कोलकाता से आईं वयोवृद्ध भक्त बसंती देवी ने जानकारी दी कि वहां परमहंस बाबा गंगारामदास जी का मंदिर स्थापित हो चुका है, जहां मानव धर्म की शाखा सक्रिय रूप से संचालित हो रही है।आश्रम के सर्वराहकार एवं समाजसेवी संस्था के अध्यक्ष महंत भोला दास ने अपने उद्बोधन में गुरुदेव के वचनों का स्मरण कराते हुए कहा कि केवल आश्रम में रहना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उनके सिद्धांतों का पालन करना ही सच्ची शिष्यता है। उन्होंने भगवान श्रीराम और माता शबरी के प्रसंग का उदाहरण देते हुए बताया कि सच्ची भक्ति दूरी से नहीं, भावना से होती है।
युवा व्यास माधव कृष्ण ने अपने प्रवचन में जीवन के मोह, क्रोध और कामना के संबंध को स्पष्ट करते हुए कहा कि मनुष्य को परमार्थ की प्राप्ति के लिए अज्ञान रूपी अंधकार से जागना होगा। उन्होंने भगवान कृष्ण और भगवान बुद्ध के उपदेशों का उल्लेख करते हुए कामनाओं से मुक्त जीवन को ही वास्तविक सुख का मार्ग बताया। साथ ही उन्होंने इतिहास और आध्यात्मिक परंपरा के उदाहरणों के माध्यम से अधर्म के दुष्परिणामों को भी रेखांकित किया।कार्यक्रम के दौरान दोपहर 1 बजे एवं रात्रि 10 बजे सभी आगंतुकों को भोजन प्रसाद वितरित किया गया। रात्रि 9:30 बजे गुरु भगवान की आरती के उपरांत ईश्वर वंदना के साथ आश्रम परिसर की परिक्रमा की गई, जिसके साथ ही महायज्ञ के छठवें दिन का सफल समापन हुआ।